Monday, 21 January 2013

वायरलैस नेटवर्क

वायरलैस नेटवर्क  के इस्तेमाल से पहले बरतें सावधानी

इस्तेमाल की सुविधा और रखरखाव में आसानी के लिहाज से वायरलैस ब्रॉडबैंड नेटवर्क की लोकप्रियता बढ़ती जा रही है। इनका इस्तेमाल करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन सामान्य नेटवर्क की तुलना में ऐसे कनेक्शनों में सुरक्षा के लिहाज से ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।  अपने वायरलैस ब्रॉड़बैंड कनेक्शन को गलत तत्वों की निगाहों और पहुंच से बचाने के लिए कुछ बुनियादी सावधानियां बरतने की जरूरत है। मसलन राउटर की जगह का चुनाव। वायरलैस राउटर को खिड़कियों या दरवाजों के आसपास नहीं बल्कि किसी केंद्रीय स्थान पर इन्स्टाल करें। आपके नेटवर्क के सिग्नल आसपास के घरों और दफ्तरों तक भी पहुंचते हैं जिसे ‘सिग्नल लीकेज’ कहा जाता है। यदि राउटर के तीन तरफ दीवारें हैं या वह घर-ऑफिस के बीचोंबीच लगा हुआ है तो इस तरह के लीकेज को रोका जा सकता है।  ज्यादातर यूज़र्स के वायरलैस राउटर का एडमिनिस्ट्रेटिव यूजऱनेम और पासवर्ड ‘एडमिन’ होता है। आपके राउटर में यह पहले से ‘फीड’ किया हुआ आता है। अगर अपने नेटवर्क को ‘हैकर्स’ की पहुंच से बचाना चाहते हैं तो अपना पासवर्ड जरूर बदल लें। जितना मुश्किल पासवर्ड हो, उतना अच्छा। आधुनिक वायरलैस राउटर्स में ‘फायरवाल’ मौजूद होती है जो उनके अनधिकृत प्रयोग और घुसपैठ को रोकती है। हालांकि ज्यादातर राउटर्स में वह ‘निष्क्रिय’ अवस्था में होती है। नेटवर्क स्थापित करते समय राउटर के फायरवॉल को ‘सक्रिय’ करना न भूलें। साथ ही साथ उससे जुडऩे वाले सभी कंप्यूटरों में एंटी-वायरस सॉटवेयर इन्स्टाल करें। अगर आपका वायरलैस नेटवर्क लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं किया जाना है तो निष्क्रियता की अवधि में अपना राउटर भी बंद कर दें, जैसे हर रात।
अभेद्य बनाएं अपना नेटवर्क
- हर कंप्यूटर और हर डिजिटल डिवाइस की पहचान करने वाली एक ‘पहचान संख्या’ होती है जिसे ‘मैक एड्रेस’ कहते हैं। आप अपना वायरलैस नेटवर्क स्थापित करते समय उन कंप्यूटरों के ‘मैक एड्रेस’ पहले ही फीड कर सकते हैं जो उससे कनेक्ट होंगे। यह दूसरे कंप्यूटरों, मोबाइलों या अन्य अनधिकृत डिवाइसेज को आपके नेटवर्क से जुडऩे से रोकेगा।
- अपने वायरलैस नेटवर्क में ‘एनक्रिप्शन’ को जरूर ‘सक्रिय’ कर दें। एनक्रिप्शन दो तरह का होता है- वाई-फाई प्रोटेक्टेड एक्सेस (डब्लूपीई) और वायर्ड इक्विवेलेंट प्राइवेसी (डब्लूईपी)। इनमें से पहली श्रेणी वाला ‘एनक्रिप्शन’ लगभग अभेद्य है। आम तौर पर वायरलैस नेटवर्क स्थापित करने वाले इंजीनियर ‘डब्लूईपी’ को सक्रिय करते हैं जिसे भेदना अपेक्षाकृत आसान है। इसके लिए अमूमन ’12345एबीसीडीई’ या ’1ए2बी3सी4डी5ई’ जैसी सामान्य कुंजियों (सिक्यूरिटी की) का प्रयोग किया जाता है जिसका अंदाजा कोई भी हैकर आसानी से लगा सकता है। आप यह गलती न करें।
- आपके वायरलैस नेटवर्क का एक ‘नाम’ भी होता है जिसे एसएसआईडी (सर्विस सेट आइडेन्टीफायर) कहा जाता है। नेटवर्क स्थापित होते समय इसका एक सामान्य सा नाम (अमूमन राउटर का ब्रांड नाम) सुझाया जाता है जिसे ज्यादातर यूजऱ ज्यों का त्यों इस्तेमाल कर लेते हैं। आप ऐसा न करें। अपने नेटवर्क को उचित नाम (एसएसआईडी) दें- जैसे ‘विकासहोम’ या ‘नवीनऑफिस’।
- वायरलैस नेटवर्क से जुडऩे वाले सभी कंप्यूटरों का आईपी एड्रेस (नेटवर्क पर पहचान के लिए दी जाने वाली खास पहचान संख्या) भी होती है। यह ‘मैक एड्रेस’ से अलग है। हर नेटवर्क ‘डीएचसीपी’ सुविधा के जरिए इन कंप्यूटरों को हर बार नया आईपी एड्रेस देने में सक्षम है। लेकिन यह सुविधा एक दुधारी तलवार है जिसके जरिए अवांछित तत्व भी आपके नेटवर्क से कनेक्ट होने के लिए वैध ‘आईपी एड्रेस’ हासिल कर सकते हैं। अगर हो सके तो ‘डीएचसीपी’ के स्थान पर अपने नेटवर्क के हर कंप्यूटर को ‘मैनुअली’ ‘आईपी एड्रेस’असाइन करें।

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